अथमलगोला प्रखंड मुख्यालय जानेवाली सड़क पर दो दिनों से गिरा है पेंड़, प्रखंड प्रशासन बना मौन
प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि ने अफसरशाही हावी होने का आरोप लगाते हुए कहा- प्रखंड स्तर से लेकर अनुमंडल स्तर तक के वरीय अधिकारीयों को सूचना दी लेकिन हटा गिरा पेंड़, अब कौन सुनेगा फरियाद
लोकतंत्र में एक कहावत है की जब प्रतिनिधियों की ही नहीं सुनी जा रही हो,तो सोचिए आम जनता का क्या हाल होता होगा.? इस कहावत का मूल भाव है कि जब आम जनता या वंचितों की रक्षा करने वाले जनप्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं होगी, तो न्याय और व्यवस्था का क्या हाल होगा, जहाँ शासन पर्दे के पीछे चलता है।
ताजा मामला पटना जिले के अथमलगोला प्रखंड का है जहाँ दो दिन पहले रात्रि में आई आंधी बारिश ने बहुतों पेड़ गिरा दिए, विडम्बना तब हुई जब एक दो पेंड़ अथमलगोला प्रखंड मुख्यालय सड़क को जोड़ने वाली (करजान फोरलेन से पहले) सड़क पर गिर गई। और गाड़ीयों के आवागमन तथा यात्रा की सुगमता में भारी परेशानी होने लगी।
प्रखंड से लेकर अनुमंडल तक सभी अधिकारियों को किया फोन,फिर भी नहीं हटा गिरा हुआ पेंड़.?
प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि अथमलगोला राजकिशोर सिंह ने तत्काल जनहित में इस दिक्कत को संज्ञान में लिया और उन्होंने अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश कुमार को सूचना दी।उनके मुताबिक अंचलाधिकारी ने मामले से पल्ला झाड़ लिया। इस पर कोई कार्यवाही न होते देख व परिचालन के दिक्कतों को देखते हुए प्रमुख प्रतिनिधि ने बाढ़ अनुमंडल पदाधिकारी को फोन किया।लेकिन वहां से भी निराशा ही हाथ लगी।
प्रतिनिधि ने डीएम एवं अन्य अधिकारियों तक शिकायत करने की कही बात
प्रखंड प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होने से नाराज प्रमुख प्रतिनिधि द्वारा डीएम एवं अन्य अधिकारियों तक शिकायत करने की बात कही गई है।
प्रमुख प्रतिनिधि द्वारा जब अंचल कर्मचारी को मौके पर ले जाकर राहगीरो की परेशानी बताई गई तब दो दिनों से कुंभकर्णी नींद में सोया प्रखंड प्रशासन जागा।तत्काल CI के नेतृत्व में गिरे हुए पेंड़ को हटाकर परिचालन की सुचारू रूप से चलाने का काम शुरू कर दिया गया। अंचल कर्मचारी मो जहीर ने बताया कि प्रमुख प्रतिनिधि की शिकायत और राहगीरों की परेशानी को देखते हुए तत्काल रास्ता साफ करने की कवायद की जा रही है।
जब जन प्रतिनिधियों की इतनी छोटे से जनहित के मामले में इतनी हुई परेशानी तो आम आदमी का दर्द कौन सुनता होगा.?
यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक शीर्ष स्तर के जन प्रतिनिधि को सिस्टम की शिथिलता का शिकार होना पड़ा तो सोचिए की आम जनता व उसकी समस्याओं का क्या हाल होता होगा.? एक छोटे से प्रखंड मुख्यालय रास्ते पर गिरा हुआ पेंड़ हटाने के लिए जब PMO कार्यालय तक फोन मिलाना पडे़ तो सोचिए की प्रखंड स्तर की अफसरशाही कितना जटिल रूप ले चुकी है।
प्रिया सिंह की रिपोर्ट
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