अथमलगोला राजकीय आवासीय विद्यालय में जांच के नाम पर फिल्मी स्टाइल में लीपापोती, मीडिया को अंधेरे में रख बंद कमरे में हुई खानापूर्ति

आखिर चारदीवारी के अंदर छुपा है कौन सा गहरा राज? पारदर्शी जांच की उठी मांग, क्या है छुपा? अथमलगोला आवासीय विद्यालय की व्यवस्था, क्योंकि अगर नीयत साफ होती तो जांच कैमरों की नजर से दूर बंद कमरों में न होती! स्थानीय लोगों ने लगाए कई गंभीर आरोप।

अथमलगोला राजकीय आवासीय विद्यालय में जांच के नाम पर फिल्मी स्टाइल में लीपापोती, मीडिया को अंधेरे में रख बंद कमरे में हुई खानापूर्ति

पटना जिले के अथमलगोला स्थित राजकीय अन्य पिछड़ा वर्ग आवासीय +2 विद्यालय में छात्राओं के बीमार होने के मामले ने अब एक बेहद गंभीर और संदेहास्पद मोड़ ले लिया है। अंदरूनी और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले को दबाने और सच्चाई पर पर्दा डालने के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र 'फिल्मी स्टाइल' में एक्टिव हो चुका है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विद्यालय प्रधान विभा कुमारी ने जो स्क्रिप्ट लिख दी है, पूरा सरकारी अमला उसी को परम सत्य मानकर आंखें मूंदे बैठा है। छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जिला से आई जांच टीम की कार्यशैली ने अब कई बड़े और संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मीडिया से आंख-मिचौली, बंद कमरे में आई टीम और चली गई!

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व निर्धारित समय के मुताबिक जिला मुख्यालय से उप निदेशक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच टीम अथमलगोला पहुँची थी।उम्मीद थी कि यह जांच पारदर्शी होगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। आरोप है कि जांच टीम ने मुख्यधारा की मीडिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया और गुपचुप तरीके से अपनी औपचारिकता पूरी कर चलती बनी।इसके बाद, इस गहरे राज को दबाने के लिए विद्यालय प्रबंधन द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों के सामने सफाई पेश करने की कोशिश की गई। सवाल उठता है कि यदि विद्यालय प्रबंधन बेदाग है, तो उसे मीडिया के कैमरों और तीखे सवालों से इतना डर क्यों लग रहा है?

 

जिला कल्याण अधिकारी के दावों की खुली पोल, 'मजाक' बनकर रह गई जांच

 

इस पूरे घटनाक्रम में जिला कल्याण अधिकारी संजीव कुमार की कथनी और करनी का अंतर भी साफ उजागर हो गया है। रविवार की सुबह दूरभाष पर हुई बात चित में उन्होंने बड़े-बड़े दावे करते हुए कहा था कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मीडिया के सामने पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न होगी। लेकिन इसके बावजूद, मीडिया को भनक तक न लगने देना और गुपचुप तरीके से जांच की प्रक्रिया को समेट लेना किसी भद्दे मजाक से कम नहीं लगता।

 

स्थानीय सूत्रों से मिल रही बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे कुप्रबंधन की जड़ विद्यालय से जुड़ी एक ऐसी हस्ती है जो अपने ऊंचे रसूख और रसूखदार अधिकारियों के बल पर सच को दबाने का भरपूर प्रयास कर रही हैं।

 

सूत्रों का कहना है कि पूर्व में भी जो एनजीओ यहाँ भोजन की सप्लाई करता था, उसके कार्यकाल में भी छात्राओं को अत्यधिक नमक वाला और घटिया भोजन परोसने की गंभीर शिकायतें आई थीं, जिसे रसूख के बल पर गौण (दबा) दिया गया। और प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।जब इस व्यवस्था की कमान 'जीविका' के हाथों में आई, तो अंदरूनी बदहाली, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की परतें एक-एक कर बाहर आने लगीं। इसी खींचतान की बलि ये मासूम छात्राएं चढ़ रही हैं। अगर भोजन से संबंधित या स्वास्थ्य से संबंधित कोई गड़बड़ी लगातार सामने आ रही थी जो विद्यालय प्रधान को तत्काल कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिए। न कि महज संदेश भेज कर पल्ला झाड़ना चाहिए। इससे प्रतीत होता है कि जरूर कोई गहरा राज दफ़न करने की तैयारी है।

 

क्या चारदीवारी के भीतर छिपा है कोई गहरा राज?

 

आवासीय विद्यालय की इस रहस्यमयी खामोशी ने बिहार के पुराने घावों को हरा कर दिया है। बिहार एक ऐसा राज्य रहा है जहाँ पूर्व में भी आवासीय परिसरों के भीतर बेहद गंभीर मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी तह तक पहुंचना आज तक भी मुश्किल ही है।

 

अथमलगोला प्रखंड से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों एवं विद्यालय प्रधान का इस मामले पर पक्ष जानने के लिए मिडिया का फोन न उठाना और पल्ला झाड़ना यह साफ संकेत दे रहा है कि इस विद्यालय की चारदीवारी के भीतर कुछ ऐसा जरूर पक रहा है, जिसे अगर सार्वजनिक कर दिया गया तो पूरे पटना जिला प्रशासन में 'भूचाल' आ जाएगा। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी चीख-चीख कर कह रही है— "दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है!" हालांकि मामले को लेकर जब पदाधिकारी से अंरेकॉर्ड बातचीत  में यह बताया गया कि हम इसकी गंभीरता से जाँच कर रहे है, अब देखना यह होगा कि मामले की सही जांच हो पाएगा या नही 

आभार स्थानीय सूत्रों पर आधारित ललन कुमार की विशेष रिपोर्ट 

मिडिया कवरेज निरंजन कुमार सिंह एवं प्रिया सिंह 


Click Here To Read More ,खबर को पढ़ने के लिए क्लिक करें

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0