ज्योतिषाचार्य राकेश झा को कुंडली विश्लेषण और वास्तु शास्त्र में उनके योगदान के लिए मिला बिहार शिक्षा रत्न सम्मान
यह सम्मान उन्हें बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर प्रदान किया गया। कार्यक्रम में महामहिम सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) की उपस्थिति भी रही, जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई।
गौरव कुमार की रिपोर्ट//पटना- राजधानी में आयोजित बिहार शिक्षा शिखर सम्मेलन के तृतीय संस्करण में “बिहार शिक्षा रत्न सम्मान” समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य राकेश झा को कुंडली विश्लेषण और वास्तु शास्त्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर प्रदान किया गया। कार्यक्रम में महामहिम सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) की उपस्थिति भी रही, जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई। पंडित विकास पाठक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इस मौके पर राकेश झा ने वेदों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि “वेद” शब्द संस्कृत की ‘विद्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ ज्ञान होता है। ऋषियों द्वारा सुने जाने के कारण इन्हें ‘श्रुति’ भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया। वेदों में ईश्वर, सृष्टि, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा व्यापक ज्ञान समाहित है।
कार्यक्रम में पंडित विकास पाठक द्वारा बताया गया कि वेदों की संरचना संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद के रूप में होती है, जबकि इन्हें समझने के लिए शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष जैसे छह वेदांग महत्वपूर्ण हैं।
यह समारोह न केवल सम्मान का मंच बना, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और वेदों के महत्व को समझाने का भी एक सार्थक प्रयास रहा।
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