बिहार में निर्भया जैसी हैवानियत, गैंगरेप के 6 दिन बाद पीड़िता के प्राइवेट पार्ट से निकला कारतूस और 3 इंच लकड़ी का टुकड़ा,लापरवाही में थानाध्यक्ष सस्पेंड
एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT का गठन, 3 नामजद, पूर्व में भी हुआ था गैंगरेप,चाकू से गोदा जांघ और सीना, पुलिस पर एफआईआर बदलने का आरोप, पीड़िता से मिलने पहुंचे आलाधिकारी, जिला विधिक प्राधिकार ने भी शुरू की जांच
ललन कुमार की विशेष रिपोर्ट-- बिहार में कानून व्यवस्था और वीमेन सेफ्टी के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए हैवानियत की एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड जैसी दरिंदगी को बदमाशों ने एक बार फिर बेगूसराय जिला में दोहराया है। गैंगरेप के 6 दिन बाद पीड़िता के प्राइवेट पार्ट से एक जिंदा कारतूस और करीब 3 इंच लंबा व आधा इंच मोटा लकड़ी का टुकड़ा निकला है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे पुलिस महकमे से लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी मनीष कुमार ने खुद घटनास्थल का मुआयना किया और सदर अस्पताल पहुंचकर पीड़िता व उसके परिजनों से मुलाकात की।
5 दरिंदों ने घर से किया अगवा, साड़ी से मुंह बांधकर किया दुष्कर्म
विभिन्न मिडिया माध्यम,पीड़िता और उसके परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 11 जून की रात 5 बदमाशों ने महिला को उसके घर से जबरन अगवा कर लिया। इसके बाद हैवानों ने महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की। उसका मुंह साड़ी से बांध दिया गया और ब्लाउज फाड़कर दोनों हाथ बांध दिए गए। दरिंदगी की हद तो तब हो गई जब हैवानों ने चाकू से महिला के सीने और जांघ को बेरहमी से चीर दिया। जांघ और कनपटी पर लातों से तब तक प्रहार किया गया जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद सभी ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया और लहूलुहान हालत में उसे एक बाथरूम में बंद कर भाग निकले। सुबह परिजनों ने उसे बेसुध हालत में बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल की लापरवाही: सोनोग्राफी में नहीं दिखा, गाँव की दाई ने निकाला कारतूस
15 जून को सदर अस्पताल से शुरुआती इलाज के बाद पीड़िता घर चली गई थी, लेकिन उसके प्राइवेट पार्ट में असहनीय दर्द बना रहा। 17 जून की सुबह जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो गाँव में प्रसव कराने वाली एक बुजुर्ग महिला (दाई) को बुलाया गया। उस बुजुर्ग महिला ने जब जांच की, तो पीड़िता के प्राइवेट पार्ट से एक जिंदा कारतूस बाहर निकाला, जिसे देखकर सबके होश उड़ गए। इस प्रक्रिया के दौरान पीड़िता दर्द से तड़पकर बेहोश हो गई।
इसके बाद जब परिजन पीड़िता को हाथ में कारतूस लेकर दोबारा सदर अस्पताल पहुंचे, तो वहां महिला डॉक्टरों ने गहन जांच की, जिसके बाद प्राइवेट पार्ट के अंदर से 3 इंच लंबा लकड़ी का टुकड़ा भी बरामद हुआ। सबसे बड़ा सवाल अस्पताल और प्राइवेट क्लिनिक की सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर उठ रहा है, जिसमें शुरुआती जांच के दौरान डॉक्टरों को अंदर मौजूद ये चीजें दिखाई ही नहीं दीं।

पुलिस पर गंभीर आरोप: 3 महीने पहले भी हुआ था गैंगरेप, एफआईआर बदलने का खेल!
पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि इसी साल 12 मार्च को भी इन बदमाशों ने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया था। लेकिन तब पुलिस ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए असली एफआईआर को बदल दिया और मामले को केवल 'घर में घुसकर छेड़खानी और लूटपाट' की मामूली धाराओं में दर्ज किया।
इसी लचर तफ्तीश के कारण आरोपी जेल से जमानत पर बाहर आ गए और जेल से छूटने के महज 8 दिन बाद उन्होंने बदला लेने की नीयत से दोबारा इस रूह कंपा देने वाली वारदात को अंजाम दे डाला। परिजनों का आरोप है कि इस बार भी पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की।
एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT का गठन, 3 नामजद
मामला तूल पकड़ते ही एसपी मनीष कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि सदर एसडीपीओ-2 कुमारी दुर्गा शक्ति के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया गया है। पीड़िता के बयान पर रामू महतो, सूरज कुमार, नीतीश कुमार समेत 3 नामजद और 2 अज्ञात बदमाशों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही पीड़िता की स्थिति को देखते हुए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। फिलहाल मिल रही जानकारी के अनुसार लापरवाही के आरोप में चकिया थानाध्यक्ष को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। और पुलिस विभाग के वरीय अधिकारी पीड़िता से पूछताछ कर रहे हैं।
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