पोखरे में डूबा छात्र, अस्पताल में नहीं मिला ईलाज , सड़क पर उतरे आक्रोशित लोग,45 मिनट तक सड़क जाम
स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल,गांव में हर तरफ शोक का माहौल बना हुआ है। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।
कन्हैया कुमार सिंह कि रिपोर्ट//सारण/मशरक- प्रखंड के पचखंडा गांव में दर्दनाक हादसे में पोखरें में डूबने से एक छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक में चिकित्सक के अनुपस्थित रहने से परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने करीब 45 मिनट तक सड़क जाम कर स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने सारण जिलाधिकारी और सिविल सर्जन से सीएचसी की लचर व्यवस्था में सुधार की मांग की।
मृतक की पहचान पचखंडा गांव निवासी मंटू शर्मा के 11 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। वह केन्द्रीय विद्यालय मशरक में वर्ग-4 का छात्र था। घटना के बाद गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मनीष गांव के अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते सभी बच्चे गांव के पीछे चंवर की तरफ चले गए। वहां स्थित पोखरें में कुछ बच्चे नहाने लगे। इसी बीच मनीष गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथ में नहा रहे बच्चों ने शोर मचाया तो आसपास मौजूद लोग दौड़कर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला।घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक पहुंची। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। चिकित्सक के नहीं रहने की जानकारी मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीणों का कहना था कि सीएचसी मशरक में यह पहली बार नहीं हुआ है। यहां अक्सर चिकित्सकों की अनुपस्थिति और लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि आपातकालीन स्थिति में भी मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पाती है। इससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। परिजनों ने बताया कि अस्पताल में उस समय किसी एमबीबीएस चिकित्सक की मौजूदगी नहीं थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) में कार्यरत आयुष चिकित्सक को ड्यूटी पर लगाया गया था। जबकि कुछ महीने पहले सारण जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चिकित्सकों की शिफ्टवार ड्यूटी का रोस्टर जारी किया गया था। उस रोस्टर के अनुसार एमबीबीएस चिकित्सकों की नियमित तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके, रविवार को अस्पताल में चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। घटना से नाराज लोगों ने सारण जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को लगातार फोन कर मामले की शिकायत की। ग्रामीणों ने मांग की कि सीएचसी मशरक की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई की जाए। लोगों ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी को अस्पताल का औचक निरीक्षण करना चाहिए ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। करीब 45 मिनट तक सड़क पर आवागमन बाधित रहा।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि यदि अस्पताल में समय पर चिकित्सक मौजूद रहते तो कम से कम परिजनों को यह संतोष होता कि बच्चे को तत्काल इलाज मिला। लोगों ने कहा कि सीएचसी की लचर व्यवस्था में तत्काल सुधार की जरूरत है। सूचना मिलने पर मशरक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में आवश्यक कागजी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मृतक मनीष कुमार दो भाइयों में बड़ा था। बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां आशा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता गहरे सदमे में हैं। गांव में हर तरफ शोक का माहौल बना हुआ है। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के आसपास स्थित पोखरों और जलाशयों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन गंभीर नहीं है। गर्मी के दिनों में बच्चे अक्सर तालाब और पोखरों में नहाने चले जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि गांवों में जलाशयों के आसपास सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए जाएं तथा बच्चों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए। इधर, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएचसी मशरक में चिकित्सकों की अनुपस्थिति, अव्यवस्था और लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन सुधार के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई होती है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य हों
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