पूर्व मुख्य न्यायधीश सुशीला कार्की बनीं नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री, शपथ ग्रहण संपन्न, जानिए कार्की का जीवन परिचय

9 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने 12 सितंबर 2025 को सुशीला कार्की को पहली महिला कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया.

पूर्व मुख्य न्यायधीश सुशीला कार्की बनीं नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री, शपथ ग्रहण संपन्न, जानिए कार्की का जीवन परिचय

ललन कुमार की विशेष रिपोर्ट-- पूर्व मुख्य न्यायधीश सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनी. उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. राष्ट्रपति ने उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. रात करीब साढ़े 9 बजे नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पोडेल ने सुशील कार्की को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सुशीला कार्की के अलावा किसी और ने शपथ नहीं ली है. 9 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने 12 सितंबर 2025 को सुशीला कार्की को पहली महिला कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया. यह जानकारी काठमांडू पोस्ट ने पुष्ट की है. हालांकि इस मंत्रिमंडल में जेन जी आंदोलन से जुड़े किसी चेहरे को शामिल नहीं किया गया है.सरकार को छह महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया गया है. इससे पहले रेस में काठमांडू के मेयर बालेन शाह और कुलमन घीसिंग नाम भी उभर कर सामने आए थे, लेकिन सुशीला ने सभी को पीछे छोड़ दिया.

 

अब ऐसे में सभी के जहन में यह सवाल उठ रहा है कि सुशीला कार्की किस जाति से ताल्लुख रखती हैं? आइए जानते हैं.

 

8 सितंबर 2025 को काठमांडू के मैतीघर मंडला में शुरू हुए प्रदर्शन सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ थे. युवाओं ने संसद भवन पर हमला किया, आगजनी की, और नेताओं के घरों को निशाना बनाया. 19 मौतें 8 सितंबर 2025 को हुईं, और 9 सितंबर को 15 और जुड़ गईं - कुल 34 मौतें. 400 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें छात्र, पत्रकार, और पुलिसकर्मी शामिल हैं. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेशनल ट्रॉमा सेंटर में 8, एवरेस्ट हॉस्पिटल में 3, और सिविल हॉस्पिटल में 3 मौतें हुईं. ओली सरकार ने बैन हटाया, लेकिन देर हो चुकी थी. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के 21 सांसदों और 4 मंत्रियों (रमेश लेखक, राम नाथ अधिकारी, प्रदीप पौडेल, प्रदीप यादव) के इस्तीफे ने सरकार को ढहा दिया। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने ओली से इस्तीफा मांगा। ओली ने दुबई भागने की कोशिश की, लेकिन सेना ने रोका। अब, जेन-जेड युवाओं ने सुशीला कार्की को अंतरिम PM चुना - Discord पर वोटिंग से नाम तय हुआ। सुशीला ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति पौडेल ने सहमति दी, और शीतल निवास में स्वागत की तैयारियां शुरू हो गईं.

 

नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ आ गया है. Gen-Z युवाओं की बगावत ने भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ जो तूफान खड़ा किया, उसके बाद अब सत्ता की कमान पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के हाथों में आ चुकी है. किसान परिवार में जन्मी सुशीला कार्की नेपाल की न्यायपालिका के इतिहास में एक विशिष्ट नाम रही हैं. माता-पिता की सात संतान में सबसे बड़ी कार्की का जन्म 7 जून 1952 को मोरंग के शंखरपुर में हुआ था. विराटनगर में रहते हुए वह बी.पी. कोइराला के परिवार और प्रजातांत्रिक आंदोलन से भी जुड़ीं.

 

न्याय परिषद् के अभिलेखों के अनुसार, उन्होंने 1971-72 में विराटनगर के महेंद्र मोरंग कॉलेज से स्नातक (बीए) की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद 1974-75 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की. शिक्षा के दौरान ही उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता दुर्गा सुवेदी से हुई और बाद में उन्होंने उन्हीं से विवाह किया. सुवेदी नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और 1973-74 में पार्टी द्वारा आयोजित चर्चित विमान अपहरण की घटना में भी शामिल रही थी.

 

सुशीला कार्की ने 1977-78 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की और 1979-80 से विराटनगर में अधिवक्ता के रूप में पेशेवर जीवन की शुरुआत की. 1985-86 से चार वर्षों तक उन्होंने धरान स्थित महेंद्र बहुमुखी क्याम्पस में अध्यापन भी किया. विराटनगर बार एसोसिएशन में सक्रिय रहकर उन्होंने कई जिम्मेदार पद संभाले और जनवरी 2005 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं.

 

उनकी ईमानदार, निडर और हक्की छवि के कारण तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रामप्रसाद श्रेष्ठ ने उन्हें सर्वोच्च अदालत में नियुक्त करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया. 22 जनवरी 2009 को वह अस्थायी न्यायाधीश बनीं और दो वर्ष बाद स्थायी. सात वर्ष सात महीने तक न्यायाधीश रहने के बाद 13 अप्रैल 2016 को वह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनीं. तीन महीने बाद संसदीय सुनवाई पूरी होने पर वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुईं और मई/जून 2017 तक करीब 15 महीने न्यायपालिका का नेतृत्व किया. उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस रहा. उन्होंने मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को जेल भेजा, लोकमान सिंह कार्की को हटाया, और महिलाओं को नागरिकता अधिकार दिए. 2017 में संसद ने महाभियोग चलाने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया. जेन-जेड ने सुशीला को चुना क्योंकि वो निडर, ईमानदार, और राजनीतिक दलों से दूर हैं. आपको बता दें कि सुशीला कार्की की जाति ब्राह्मण है. इससे पहले पीएम रहे, केपी शर्मा ओली भी इसी जाति से ताल्लुख रखते थे.

 

बहरहाल, प्रदर्शन में 34 मौतें हुईं - काठमांडू में 17, पोखरा में 5, इटहरी में 4, और अन्य शहरों में बाकी. सुशीला के नेतृत्व में अब भ्रष्टाचार की जांच, सोशल मीडिया नियम, और चुनाव पर फोकस होगा. युवा अब सफाई अभियान चला रहे हैं -क्रांति के बाद निर्माण का समय है. जेन-जेड क्रांति ने 34 मौतों की कीमत पर ओली को हटाया. सवाल ये है- क्या सुशीला नेपाल को नई दिशा देंगी?(मीडिया सभार)


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