अफसर आए तो खुला फर्जीवाड़े का खेल-- 236 बच्चे मौजूद, ऐप पर 670 चढ़ाकर डकारा जा रहा था मिड-डे मील
बिहार की लचर और बदहाल शिक्षा व्यवस्था में कागजी हेरफेर और भ्रष्टाचार किस कदर हावी है, इसकी बानगी मोकामा प्रखंड के मध्य विद्यालय बरहपुर में देखने को मिली।
पटना--बिहार की लचर और बदहाल शिक्षा व्यवस्था में कागजी हेरफेर और भ्रष्टाचार किस कदर हावी है, इसकी बानगी मोकामा प्रखंड के मध्य विद्यालय बरहपुर में देखने को मिली। बीते सोमवार दोपहर लगभग 12:57 बजे अनुमंडल पदाधिकारी बाढ़, कृष्णा जोशी (आईएएस) ने जब विद्यालय का औचक निरीक्षण किया, तो पूरी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक दयानिधि प्रसाद सिंह बिना किसी पूर्व सूचना के नदारद मिले। शिक्षकों की हाजिरी से लेकर बच्चों की रजिस्टर में दैनिक उपस्थिति दर्ज तक नहीं की गई थी—जो शिक्षा महकमे की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
असली खेल तो मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के आंकड़ों में चल रहा था। भौतिक सत्यापन में स्कूल में कुल 236 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले, जबकि एमडीएम के मोबाइल ऐप पर प्रभारी राजेश प्रसाद द्वारा उपस्थिति 670 दर्ज की गई थी। पूछताछ में प्रभारी ने बताया कि शिक्षिका पूजा सिंह के कहने पर उन्होंने यह आंकड़ा भरा। वहीं, पूजा सिंह ने पल्ला झाड़ते हुए खुलासा किया कि प्रधानाध्यापक ने फोन पर 236 के बजाय 670 बच्चों की उपस्थिति चढ़ाने का फरमान सुनाया था।
यानी कागजों पर 434 फर्जी बच्चों का भोजन दिखाकर किस तरह सरकारी फंड की बंदरबांट की जा रही थी, यह साफ हो गया। एसडीएम ने प्रधानाध्यापक का एक दिन का वेतन स्थगित करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है तथा संतोषजनक जवाब न मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। पूरा निरीक्षण प्रतिवेदन कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी, पटना को भेज दिया गया है।
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