मुफ्त इलाज का दावा- लेकिन सफर में ठूंस-ठूंसकर रवाना हुए मासूम, 17 बच्चे, 23 परिजन और सिर्फ 5 एम्बुलेंस
इलाज मुफ्त है लेकिन व्यवस्था ऐसी कि मासूम बच्चों और उनके परिजनों को सफर भी किसी परीक्षा से कम नहीं लगा। सवाल यह नहीं कि इलाज मिल रहा है बल्कि यह है कि क्या मरीजों की गरिमा और सुविधा भी सरकारी व्यवस्था की प्राथमिकता है।
कटिहार से रतन कुमार की रिपोर्ट -जिला में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवालिया नहीं बल्कि तंज कसने का मौका दे दिया। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 17 मासूम बच्चों को इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। उनके साथ 23 परिजन भी थे। लेकिन पूरे काफिले के लिए स्वास्थ्य विभाग ने महज 5 एम्बुलेंस की व्यवस्था की। यानी कुल 40 लोगों को पांच एम्बुलेंस में बैठाकर लंबी दूरी के सफर पर रवाना कर दिया गया। बिहार सरकार इस योजना के तहत दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों का मुफ्त इलाज कराने का दावा करती है।
इलाज की व्यवस्था सराहनीय है लेकिन इलाज तक पहुंचने का इंतजाम सरकारी दावों की पोल खोलता नजर आया। जिन एम्बुलेंस को गंभीर मरीजों की सुविधा और सुरक्षित परिवहन के लिए बनाया गया है वही क्षमता से अधिक लोगों को ढोती दिखाई दीं। तस्वीरें बताती हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच अब भी लंबा फासला है। इलाज मुफ्त है लेकिन व्यवस्था ऐसी कि मासूम बच्चों और उनके परिजनों को सफर भी किसी परीक्षा से कम नहीं लगा। सवाल यह नहीं कि इलाज मिल रहा है बल्कि यह है कि क्या मरीजों की गरिमा और सुविधा भी सरकारी व्यवस्था की प्राथमिकता है।
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