वर्दी की हनक या कानून के रखवालों को कानून का नहीं रहा डर, लेकिन आमजन को जरूर है थप्पड़ और बदसलूकी का डर, विभाग की भी हो रही किरकिरी
सुशासन का चोला ओढ़ने वाली और नारी सम्मान के साथ अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली बिहार पुलिस में थप्पड़ और बदसलूकी का बढ़ता क्रेज बिहारवासियों के लिए बनता जा रहा परेशानी का सबब, पीपुल्स फ्रेंडली का दावा हो रहा खोखला साबित, सरकार के साथ विभाग को भी गंभीरता के साथ सोच कर महज निलंबन ही नहीं और सख्त कदम उठाने की है जरूरत
पटना --बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा भले ही पीपुल्स फ्रेंडली और फरियादियों के साथ सलूकत से पेश आने का निर्देश दिया जाता है। लेकिन उनके कर्मी इन आदेशों को शायद सुन कर अनसुना कर देते हैं। यही कारण है कि बिहार के विभिन्न जिलों से और मुख्यालय के नाक के नीचे पटना पुलिस के थप्पड़ और बदसलूकी के चर्चे आम होते जा रहे हैं। जिस वर्दी का नाम आम जनता के लिए सेवा होना चाहिए उसे खौफ का नाम दिया जाना कहीं से भी न्यायोचित प्रतीत नहीं हो रहा है।
ऐसा प्रतीत होता है कि कानून के रखवालों को ही कानून का डर समाप्त हो चुका है। सोशल मीडिया या प्रिंट मिडिया जहां भी नजर डालें, रखवालों के थप्पड़ों की कहानी कहते नहीं थक रहा है। इस कारण विभाग को भी भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। और इनके साथ जो कर्मयोगी और व्यवहारिक हैं, जिनके दम पर बिहार पुलिस का इकबाल बुलंद है उन्हें भी शर्मिंदा होना पड़ रहा है।खाकी शपथ भूल कर आमजनों के इज्जत को खाक में मिलाने में जुटी हुई लगती है।
बिहार पुलिस मुख्यालय एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी के हालिया आदेश एवं निर्देशों पर गौर करें और उसपर पुलिस कर्मी अमल करें तो विभाग का सर गर्व से ऊंचा होना तय है। क्योंकि जवानों ने अपनी काबिलियत और व्यवहारिकता के बल पर विभाग का मान सम्मान कायम रखने का काम किया है। लेकिन कुछ महिला/पुरुष कर्मियों ने अपनी हनक में अव्यवहारिकता से विभाग की छवि धूमिल करने का काम किया है।
अपराधियों को पुलिस और कानून का भय होना स्वाभाविक है। जिससे अपराध पर लगाम भी लगेगी। लेकिन आमजन में अगर पुलिस का भय हो जाय तो फिर कानून और न्याय की परिभाषा ही बदल जाएगी। कई ऐसे मामले नजर में हैं जिसमें फैमिली के साथ या शुभ मुहूर्त में जा रहे व्यक्ति या न्याय की शांतिपूर्ण गुहार लगा रहे फरियादी के साथ बदसलूकी और थप्पड़बाजी की घटना को अंजाम दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय के साथ ही सरकार को भी इस गंभीर मुद्दे पर सोचने की जरूरत हैं। कभी रिल्स बनाने को लेकर तो कभी बदसलूकी को लेकर तो कभी थप्पड़बाजी को लेकर लगातार बिहार पुलिस चर्चा में है। विभाग निलंबन की करवाई भी कर रही है।कोई शक नहीं लेकिन शायद इस तरह का कृत कर विभागीय गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों के लिए महज निलंबन की करवाई ही नहीं इससे भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है। जिससे बिहार पुलिस की साख में दाग न लग सके।सोशल मीडिया पर वर्दी का रौब दिखाने वाले स्टेटस और रिल्स की बाढ़ सी आई हुई है। जिसपर सख्ती से लगाम लगाने की जरूरत है।
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