रविशंकर कुमार के साथ गौरव कुमार की रिपोर्ट//पटना-- सदा शिव, सर्वदा शिव। कहते है अगर सच्ची श्रद्धा से भक्ति की जाए तो ,ईश्वर साक्षात् दर्शन देते है। और ढूंढने पर तो भगवान भी मिल जाते है। जी हां ऐसा ही एक चमत्कार राजधानी पटना के आलमगंज थाना अंतर्गत नारायण बाबू गली खजूरबन्ना में हुआ है। जहां एक जमीन पर कचड़े के ढेर से ढका हुआ लगभग 500 वर्ष पुराना एक शिव मंदिर मिला है। वो जमीन किसी मठ के नाम पर छोड़ी गई थी। मंदिर के बारे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह मंदिर 15वीं शताब्दी का हो सकता है। मंदिर मिलने के बाद स्थानीय लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है। और लोग पूजा करने के लिए काफी उत्साहित देखे जा रहे है। मंदिर की आकृति गुंबदनुमा है। जिसमें एक शिवलिंग है। और दो पदचिह्न है। और गौमुख है। जिससे कि जल और दूध चढ़ने पर गौमुख के रास्ते बाहर निकलता है।

मंदिर के मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से इस स्थल की खुदाई की और साफ सफाई कर पूजा शुरू कर दी। तब से भक्तों का तांता लगा है। मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मंदिर किसी खास धातु का है। इससे लगातार पानी निकल रहा है। कितना भी कपड़े से पोछों पानी रिसता ही रहता है। यह चिकने काले पत्थर का मंदिर है। उसी मंदिर में शिवलिंग और पदचिह्न हैं। जैसे ही लोगों ने मंदिर को देखा जयकारे लगाने लगे। हालांकि, इस मंदिर के अवशेषों के पुरातन होने या इसके सही समय की पहचान के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यह मंदिर कितने साल पुराना है, इस पर विषय पर अभी भी संशय बना हुआ है।मगर, यह जगह अब एक धार्मिक स्थल बन चुका है। और यहां पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है। लोगों ने आपसी सहयोग से मंदिर की सफाई और जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस प्राचीन मंदिर को फिर से अपने पुराने स्वरूप में लाएंगे।
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आपको बता दें कि पाटलिपुत्र के नाम से प्रचलित पटना सिटी क्षेत्र में कभी अखंड भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कहे जाने वाले आचार्य चाणक्य का भी आसरा हुआ करता था ।जानकार बताते हैं कि चाणक्य कई वर्षों तक पटना सिटी के गंगा तट पर अपना समय व्यतीत किये।
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